आपने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सिविल लाइंस का नाम सुना होगा ये आमतौर पर शहर के बाकी हिस्से से अधिक विकसित लगता हैसुं दर इमारतें शिक्षित लोगों की बस्ती सहित बहुत कुछ सिविल लाइंस का नाम और कॉन्सेप्ट अंग्रेजों का है। ये उनके जामने की जगह थी। लेकिन अब सिविल लाइंस शायद इतिहास में रह जाएगा। इसका कारण यह है कि केंद्र सरकार औपनिवेशिक कानूनों और नियमों की जगह भारतीय मूल्य और देश की संस्कृति को दिखाने की कोशिश कर रही है
टाइम्स ऑफ इंडिया ने कहा कि सरकार ब्रिटिश शासन के बचे खुचे निशानों की पहचान करने के लिए बहुत काम कर रही है सरकार का लक्ष्य है ऐसे विचारों को औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त करना और अपनी राष्ट्रियता को अपनाना। जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से औपनिवेशिक दौर की प्रथाओं की पहचान करने और भारत में आधारित समाधानों की सिफारिश करने को कहा
19वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने सिविल लाइंस बनाए। इसमें बेहतर ढांचा और सुविधाओं को उपलब्ध कराने वाले विशेष क्षेत्रों को बनाने की योजना थी। ये इलाके सत्ता और औपनिवेशिक राजाओं से बहुत करीब थे। इन्हें वरिष्ठ औपनिवेशिक नागरिक अधिकारियों के अधीन रहना था। दिल्ली के अलावा सिविल लाइन्स उत्तर प्रदेश राजस्थान हरियाणा पंजाब मध्य प्रदेश बिहार और महाराष्ट्र में भी हैं
सिविल लाइंस विकास प्लानिंग के तहत बनाया गया विकास था। शहर में कैंटोनमेंट बोर्ड और सिविल लाइंस था। इसी तरह शहर विकसित हुए हैं। एक शहरी योजनाकार और आर्किटेक्ट ने कहा कि जिन्होंने ब्रिटिश वास्तुकला और योजना का व्यापक अध्ययन किया था
DDA (योजना) के पूर्व कमिश्नर AK Jain ने कहा कि देश भर में सिविल लाइंस पूरी तरह से बदल गए हैं। अब बंगलों के स्थान पर बहुमंजिला इमारतें हैं। ये प्रमुख शहरों का हिस्सा बन गए हैं और उनकी आबादी कई गुना बढ़ी है। नाम बदलना शायद ही कोई महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि औपनिवेशिक भारत में लगभग 75 कैंटोनमेंट बनाए गए थे। सिविल लाइंस सैन्य क्षेत्रों जैसे थे पिछले दस वर्षों में सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण सड़कों और कार्यालयों के नाम बदले हैं जिनके मूल नाम ब्रिटिश काल के प्रतिष्ठित प्रतीक थे। इनमें से कुछ ने दिल्ली में रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










