कर्नल नोरीन शानेट जॉन बनी पहली महिला MEG कमांडर रचा इतिहास

कर्नल नोरीन शानेट जॉन बनी पहली महिला MEG कमांडर रचा इतिहास

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भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाएं बढ़ती जा रही हैं और नेतृत्व भी कर रही हैं कर्नल नोरीन शानेट जॉन बेंगलुरु के प्रतिष्ठित मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप (एमईजी) और सेंटर में प्रशिक्षण बटालियन की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सम्मानित इंजीनियरिंग इकाइयों में से एक MEG अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों की ट्रेनिंग में महत्वपूर्ण योगदान देती है

कर्नल नोरीन के सैन्य सेवा में उनके शुरुआती दिनों यानी नेशनल कैडेट कोर (NCC) में कैडेट के रूप में बिताए गए दिनों ने उनके जीवन पर व्यापक प्रभाव डाला है। केरल के कालीकट स्थित प्रोविडेंस महिला कॉलेज की छात्रा रह चुकी कर्नल नोरीन ने एनसीसी एक्टिविटीज में अपने अद्भुत प्रदर्शन के माध्यम से अपनी पहचान बना ली थी। 1989 में NCC रिपब्लिक डे कैंप में दिल्ली मे उन्होंने ऑल इंडिया बेस्ट कैडेट प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। 1993 में उन्हें रिपब्लिक डे कैंप में बेस्ट परेड कमांडर का भी पुरस्कार मिलाउसी कैंप में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की रैली के दौरान संयुक्त गार्ड ऑफ ऑनर की कमान भी संभाली गई

कर्नल नोरीन के सैन्य करियर का आधार इन्हीं घटनाओं ने बनाया जो उनमें अनुशासन नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित किया। 7 मार्च 1998 को कर्नल नोरीन को कोर ऑफ इंजीनियर्स में कमीशन मिला। 26 साल से अधिक समर्पित सेवा के दौरान उन्होंने रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया है और ऑपरेशनल इंस्ट्रक्शनल और नेतृत्व संबंधी पदों पर काम किया है

उन्होंने वरिष्ठ समूह परीक्षण अधिकारी (जीटीओ) के रूप में इलाहाबाद (प्रयागराज) में 14वीं सेवा चयन बोर्ड (SSB) में इस महत्वपूर्ण पद के लिए उम्मीदवारों का मूल्यांकन और चयन किया
उन्हें जनवरी 2020 में स्थायी कमीशन दिया गया जो सेवा के प्रति उनके अनवरत प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है
जनवरी 2023 में कर्नल (सेलेक्ट ग्रेड) पद पर पदोन्नति मिली

कर्नल नोरीन के निजी जीवन की बात करें तो वे अब रिटायर्ड कर्नल मोनिश दास से विवाह कर चुके हैं। मद्रास सैपर और कोर ऑफ इंजीनियर्स में साथी अधिकारी हैं। NCSC कैडेट से कमांडिंग ऑफिसर तक की उनकी यात्रा की कहानी युवा महिलाओं को प्रेरणा देती है। कर्नल नोरीन एमईजी और सेंटर में भावी अग्निवीरों की ट्रेनिंग का नेतृत्व करते हुए कर्तव्य सम्मान और निस्वार्थ सेवा के सेना के मूल सिद्धांतों का निरंतर प्रदर्शन करते हैं। सेना की इंजीनियरिंग रीढ़ भी उनके नेतृत्व में मजबूत होती है

Neha Mishra
Author: Neha Mishra

नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।

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