नारा या स्लोगन राजनीति में एक अलग जगह है यह पार्टियों को सत्ता में लाता है ममता को बंगाल की राजनीति में खेला होबे माटी मानुष और मां जैसे शब्दों ने अलग पहचान दी 15 साल में पहले 2011 में उन्होंने जिस स्लोगन के माध्यम से पदार्पण किया था। 2026 में उन्होंने उसी स्लोगन को फिर से लागू किया। इसके बल पर वह चौथी बार प्रधानमंत्री बनने का दावा कर रही हैं।
ममता बनर्जी ने 2011 में पहली बार सत्ता में आते ही नारा दिया था बदला नहीं बदलाव चाहिए। उन्हें वामपंथी सरकार के 34 साल के राज को खत्म करना चाहिए था लेकिन वे किसी से शत्रुता या बदला नहीं लेना चाहते थे बल्कि सिस्टम को सुधारना चाहते थे। उधर 2026 के लिए उन्होंने इसे बदल दिया है। अब वे परिवर्तन की जगह प्रतिशोध कहते हैं।
नारे में दो बंगाली शब्द बदला और बोडोल (परिवर्तन) हैं। ममता बनर्जी ने पहले खुद को एक नेता के रूप में प्रस्तुत किया जो शांति और सुधार लाना चाहती थीं। लेकिन अब उनकी भाषा थोड़ी तीखी हो गई है। वे विरोधियों को कठोर जवाब देने या बदला लेने की रणनीति पर काम कर रहे हैं
याद रखें कि 2011 में सीपीएम की सरकार गिरी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई। नारा हमेशा से उनकी राजनीति में महत्वपूर्ण रहे हैं। वे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं जो बंगालियों से जुड़ते हैं। उनकी राजनीतिक पहचान मां माटी मानुष और खेला होबे से हुई
2026 का नया नारा थोड़ा अलग है। इसमें केवल दो शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। 2011 के नारे को इस बार भी ममता बनर्जी ने अपनाया है। Bengal में आप दो चरणों में चुनाव कर सकते हैं। 23 अप्रैल को पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान होगा जबकि 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होगी। दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










