UP News वाराणसी केस में ATS पूछताछ के बाद पिता ने किया चौंकाने वाला दावा

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UP समाचार: उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र एटीएस की टीम आईबी अधिकारियों के साथ वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र के पठानी टोला इलाके में रहने वाले डॉक्टर आरिफ अंसारी के घर पहुंची थी। टीम ने लगभग आठ घंटे तक अपने 18 वर्षीय बेटे अबु बकर अंसारी से संदिग्ध आतंकी कनेक्शन पर पूछताछ की डॉक्टर आरिफ अंसारी इस मामले में पहली बार आए हैं

पूरे मामले में उन्होंने अपना पक्ष रखा है डा. आरिफ अंसारी ने टीवी 9 डिजिटल से बातचीत में बताया कि उनका बेटा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव था। उस समय उसने कुछ अज्ञात हैंडल से किए गए लेखों को लाइक किया और उन पर चर्चा की। इसलिए जांच एजेंसियां उनके घर गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूछताछ केवल उनके बेटे से हुई और परिवार के किसी अन्य सदस्य से कोई सवाल-जवाब नहीं किया गया

उनका कहना था कि पूछताछ के बाद एजेंसियां अबु बकर के एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन अपने साथ ले गईं। डॉक्टर अंसारी ने बताया कि उनके बेटे को 22 अप्रैल को आगे की पूछताछ के लिए मुंबई बुलाया गया था उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान एजेंसियों ने पूरी तरह से पेशेवर तरीके से काम किया और सहयोग किया

डॉक्टर आरिफ अंसारी ने बताया कि उनका बेटा इसी साल 18 वर्ष का हुआ है और नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा है। वह पिछले कुछ महीनों से डिप्रेशन और मानसिक तनाव से गुजर रहा था।उन्हें बताया गया कि नवंबर से फरवरी के बीच अबु बकर बहुत डिप्रेस्ड था और दवा भी ले रहा था

उस समय वह जरूरत से अधिक सोशल मीडिया एक्टिव था। Dr. Ansari का विचार है कि वह उसी समय गलत लोगों या संदिग्ध हैंडलर से संपर्क में आया होगा। साथ ही उन्होंने बेटे के ब्रेनवॉश की आशंका व्यक्त की है। उसने कहा कि 4 मार्च से उसने सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूरी बना ली है

डॉक्टर अंसारी ने साफ कहा कि अबु बकर किसी तरह के कट्टर धार्मिक विचार वाला नहीं है जब उसने बेटे के धार्मिक रुझान को पूछा।उन्होंने कहा कि वह नमाज पढ़ता है  लेकिन उसके विचार धार्मिक नहीं हैं। दोनों बच्चों को कभी मदरसे में नहीं भेजा गया और उनकी पढ़ाई शहर के नामी कॉन्वेंट स्कूलों से हुई है

Abu Baker भी नीट की तैयारी करने के लिए एक साल की कोचिंग ली थी और ऑनलाइन पढ़ाई कर रही है। घर पर अरबी सिखाने के लिए एक आलिम लगाया गया है वह अरबी कुछ बोलता है, लेकिन उर्दू पूरी तरह से नहीं जानता

बातचीत में डॉक्टर अंसारी ने कहा कि उनके बेटे का कोई विशिष्ट दोस्त सर्किल नहीं है और वह अपनी भावनाएं किसी से नहीं साझा करता। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि उनके और बेटे के बीच संचार कमजोर था

उनका कहना है कि परिवार को आज नहीं देखना पड़ता अगर बेटा खेलकूद और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेता। अकेलेपन की वजह से वह सोशल मीडिया पर जरूरत से अधिक समय बिताने लगा

Dr. Ansari ने जांच एजेंसियों पर अपना पूरा भरोसा जताया है। उनका कहना था कि वह 1995 बैच के एमबीबीएस डॉक्टर हैं और हनुमान फाटक क्षेत्र में एक क्लिनिक चलाते हैं। उन्होंने अपने लंबे जीवन में कभी नहीं सोचा था कि उनके परिवार को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा

उनका आह्वान है कि सरकार बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए कड़े कानून बनाए उनका कहना था कि आज की स्थिति शायद कुछ अलग होती अगर मेरा बेटा सोशल मीडिया पर इतना एक्टिव नहीं रहता था

Neha Mishra
Author: Neha Mishra

नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।

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