मेरा भाई बहुत अच्छा था और सबसे प्यार करता था लेकिन उस दिन वह बहुत परेशान और रोया यह शब्द प्रियांशु श्रीवास्तव की बहन गरिमा के हैं जो अपने भाई की मृत्यु से दुखी है। प्रियांशु जो कानपुर के बर्रा इलाके में रहता था की मौत ने एक परिवार के अलावा एक युवा वकील के मानसिक कष्टों को भी उजाड़ दिया है। प्रियांशु की मां नीतू श्रीवास्तव और बहन गरिमा ने बताया कि वह उन दोनों के बहुत करीब था
मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया कि गरिमा ने घटना वाले दिन परीक्षा देकर लौटने पर भाई को रोते हुए देखा। फोन पर भी उसे समझाने की कोशिश की थी। परिवार का कहना है कि प्रियांशु की पेशेवर जिंदगी और काम के दबाव जैसे बकाया पैसा न मिलना और पेंडिंग काम उसे मानसिक तनाव में डाल रहे थे
प्रियांशु का दो पन्नों का सुसाइड नोट पुलिस को सोशल मीडिया पर मिला है। प्रियांशु ने इस नोट में अपने बचपन की कड़वी यादों का जिक्र करते हुए पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव पर मानसिक प्रताड़ना (मेंटल टॉर्चर) और अत्यधिक सख्ती बरतने के आरोप लगाए हैं। डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि प्रियांशु को सुसाइड से ठीक पहले फोन पर बात करते हुए भी सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है। पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता और प्रियांशु ने बताए कड़वे अनुभवों की जांच कर रही है
दूसरी ओर मां नीतू श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पति और वह दोनों बच्चों की देखभाल करते थे। नोट में बचपन की घटनाओं का उल्लेख है उसमें उनके पति की कोई भूमिका नहीं थी
प्रियांशु के पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने भी सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उसने कहा कि वह सिर्फ अपने बेटे की सुरक्षा के लिए सतर्क रहते थे। पिता ने कहा कि अगर वह दोस्तों के साथ ढाबे पर जाने को कहता तो हम व्यस्त सड़क के कारण मना कर देते और ऑनलाइन खाना मंगाने की सलाह देते। रात में कहीं जाने पर हम अपने दोस्त से नाम और पता पूछते थे। घटना वाले दिन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पर्दे को लेकर हुई एक छोटी बहस के बाद उसने प्रियांशु को संस्कारों की दुहाई दी जिसे शायद उसने दिल पर लगा लिया था
राजेंद्र ने कहा कि मैं घटना वाले दिन ऑफिस जा रहा था। पर्दा बाहर था जब मैंने दरवाजा बंद किया। प्रियांशु ने दरवाजा खोलते ही पर्दा भी खुला। तो उसने चिल्लाकर कहा कि इस तरह किस मूर्ख ने पर्दा लगाया है। मैंने फोन करके पूछा कि क्या यही संस्कार आपने सीखा है आज तुम इस तरह बात कर रहे हो हम मूर्ख हैं
बहन गरिमा ने बताया कि प्रियांशु का व्यवहार कुछ समय से अस्थिर हो गया था वह कभी-कभी अचानक खुश हो जाता था तो कभी-कभी बहुत दुखी हो जाता था। पेशे से वकील होने के अलावा वह साइबर कैफे में भी काम करता था। उसे लाखों रुपये का काम करने के बावजूद पैसे नहीं मिल रहे थे जिससे वह बहुत चिंतित था
लेकिन पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है ACP आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि परिवार ने अभी तक कोई लिखित पत्र नहीं भेजा है। कानपुर कचहरी में हुई इस घटना ने पिता-पुत्र के संबंधों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर एक नई बहस छेड़ दी है।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










