विरोध और विफलता अक्सर सफलता के रास्ते में आते हैं जिन लोगों ने इन चुनौतियों का डटकर सामना किया वे अंतत मंजिल पर पहुंचेंगे बिहार के अनुराग कुमार की कहानी भी प्रेरणादायक है क्योंकि उन्होंने अपनी असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बना लिया। उन्होंने पढ़ाई में एवरेज रहने और कई बार असफल होने के बावजूद हार नहीं मानी। दृढ़ इरादे धैर्य और मेहनत से उन्होंने यूपीएससी की कठिन परीक्षा को न सिर्फ पास किया बल्कि दूसरी बार शानदार रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनकर दिखाया कि सच्ची लगन से कुछ भी संभव है।
अनुराग कुमार बिहार के कटिहार जिले से हैं और वे पहले एक आम छात्र थे उन्होंने आठवीं तक हिंदी में पढ़ाई की लेकिन बाद में अंग्रेजी में पढ़ने पर उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वह शुरू में पढ़ाई में बहुत तेज नहीं थे लेकिन उन्होंने मेहनत की। 10वीं में अच्छे अंक हासिल किए लेकिन 12वीं में मैथ्स की प्री-बोर्ड परीक्षा में फेल गए। उन्हें इस झटके ने नहीं तोड़ा बल्कि उन्हें मजबूत बनाया जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने बाद में बेहतर अंक हासिल किए।
अनुराग को दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला मिला लेकिन उनका सफर यहां भी कठिन था। उन्हें ग्रेजुएशन के दौरान कई विषयों में असफलता हुई। उन्होंने इसके बावजूद अपनी डिग्री पूरी की। जब उन्होंने पढ़ाई जारी रखी उन्होंने खुद को बेहतर बनाने का विचार किया और एक नई शुरुआत करने का फैसला किया।
अनुराग ने पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान यूपीएससी के लिए तैयारी शुरू की। 2017 में उन्होंने पहली बार परीक्षा पास की और पूरी लगन से पढ़ाई की लेकिन उनकी रैंक 677 थी। वह इससे संतुष्ट नहीं हुए और फिर से प्रयास किया। 2018 में उन्होंने लगातार मेहनत और बेहतर रणनीति के साथ 48वीं रैंक हासिल की और आईएएस अधिकारी बन गए। आज वह बेतिया में सहायक जिला अधिकारी हैं और अपनी कहानी से युवा लोगों को पता चलता है कि विफलता अंत नहीं होती बल्कि सफलता की शुरुआत हो सकती है।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










