गुरुवार को मिजोरम के आखिरी जातीय विद्रोही समूह ने अपने हथियार त्याग दिए। इसके साथ ही राज्य विद्रोह-मुक्त हो गया मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा। अधिकारियों ने कहा कि ये समूह पिछले कई सालों से अस्तित्व में नहीं था लेकिन लालमिंगथांगा सनाते के नेतृत्व वाले हमार पीपल्स कन्वेंशन (डेमोक्रेटिक) या HPC(D) के एक गुट ने धीरे-धीरे आपराधिक गतिविधियां जारी रखी। सनाते गुट को पूर्वोत्तर राज्य का आखिरी विद्रोही समूह माना गया था।
HPC(D) संविधान की छठी अनुसूची के तहत हमार समुदाय के लोगों के लिए एक स्वतंत्र जिला परिषद की मांग कर रहा था। सनाते सहित इस समूह के कुल 43 सदस्यों ने दिन भर आइजोल के पास सेसावंग में सरकार के सामने अपने हथियार डाल दिए। 14 अप्रैल को मिजोरम सरकार और HPC(D) के बीच हुए शांति समझौते के बाद यह घर वापसी समारोह आयोजित किया गया। ये राज्य में उग्रवाद को खत्म करने में सफल रहे हैं।
इस कार्यक्रम में बोलते हुए लालदुहोमा ने कहा कि HPC(D) विद्रोह का साया हर बार मिजोरम में शांति की बात होती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम खुले दिल से बातचीत करके एक समझौते पर पहुंचे। हमारे गृहमंत्री और उनके साथियों ने बहुत कुछ किया। उनका कहना था कि हम आज अपने लक्ष्य तक पहुंच गए हैं। अब हम गर्व से कह सकते हैं कि मिजोरम एक शांतिपूर्ण देश है।
लालदुहोमा ने कई मिजो जनजातियों से फिर से एकजुट होने की मांग करते हुए कहा कि कोई भी जनजाति एकमात्र मिजो पहचान से ऊपर नहीं है। उनका कहना था कि हम सभी मिजो हैं। मिजो समुदाय में आज की उप-जनजातियां पूरी तरह से स्वतंत्र होने की कोशिश करने की संभावना कम है। अपनी साझा मिजो पहचान में ही हमें संतोष मिलना चाहिए। हम एकजुट होकर ही आगे बढ़ सकते हैं।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










