अंधेरे को चीरती रोशनी: 3 शिक्षकों की लीगल टीम से 25 लाख को न्याय की उम्मीद

अंधेरे को चीरती रोशनी: 3 शिक्षकों की लीगल टीम से 25 लाख को न्याय की उम्मीद

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मंजिल उन्हीं को मिलती है जो अपने हौसलों से डरते नहीं अकेले ही लड़ी जाती है जिंदगी की जंग क्योंकि किस्मत हो न हो वक्त ज़रूर बदलता है।

एक सितम्बर 2025 को आदेश आता है कि देश के सभी सेवारत शिक्षकों को जिनकी नौकरी पांच साल से अधिक है उनके लिए दो साल के अंदर TET पास करना अनिवार्य है। इस एक आदेश ने शिक्षकों के सामने घोर अंधेरा खड़ा कर दिया। वर्षों की सेवा अनुभव और समर्पण पर अचानक प्रश्नचिह्न लग गया। विद्यालयों में अवसाद और भविष्य की चिंता पसर गई।

इस दौरान तीन शिक्षकों श्री संतोष सिंह बघेल श्री अमित सिंह व श्री राजेश सिंह ने लीगल टीम के जरिए धैर्य सकारात्मक सोच और योजनाबद्ध तरीके से रणनीतियाँ बनाईं। इन त्रिमूर्ति दियों ने अंधकार में एक प्रकाश की उम्मीद की किरण दिया

लीगल टीम ने साहस दिखाते हुए कम संसाधनों में अपनी तरफ से मुकुल रोहतगी और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे दिग्गज काउंसलर को हायर किया। जम्मू-कश्मीर मध्यप्रदेश जैसे कई राज्यों को पुनर्विचार याचिका में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे लाखों शिक्षकों के सामने उम्मीद की किरण दिखाई दी और तीन शिक्षकों से शुरू हुई लीगल टीम एक विचारधारा बन गई जिसमें हज़ारों-हज़ार शिक्षक जुड़ते चले गए।

आज उसी लीगल टीम के मजबूत प्रयासों व अकाट्य तर्कों से सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली है। आज लीगल टीम की वजह से 25 लाख शिक्षकों में अब न्याय की आस जाग चुकी है।
लीगल टीम के संघर्षों पर यह लाइन सटीक बैठती है
हौसले बुलंद कर रास्तों पर चल दे
तुझे तेरा मुक़ाम मिल जायेगा
बढ़ कर अकेला तू पहल कर
देख कर तुझको काफिला खुद बन जायेगा

Neha Mishra
Author: Neha Mishra

नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।

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