रक्षा मंत्रालय ने भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई की है लॉन्ग रेंज सर्विलांस रडार (LRSR) बनाने के लिए मंत्रालय ने जानकारी की मांग (RFI) की है। आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पहल है
सेना की निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ाना और पुराने रडार सिस्टम को बदलना इन नए रडार सिस्टम का लक्ष्य है। 1970 के दशक से पुराने रडार प्रणाली चल रहे हैं
नए रडार पूरी तरह मोबाइल होंगे जिससे वे जरूरत के हिसाब से जल्द ही कहीं भी लगाए जा सकेंगे। DRDO ने देसी GaN (Gallium Nitride) सेमीकंडक्टर और 4-डायमेंशनल AESA तकनीक विकसित की है जो इनकी सबसे बड़ी ताकत होगी। इस तकनीक से रडार अधिक शक्तिशाली कम गर्म होने वाले और शत्रुओं के इलेक्ट्रॉनिक हमलों से बचेंगे
ये रडार लक्ष्य को 40 किलोमीटर तक ऊंचाई पर देखेंगे और 450 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को पहचान सकेंगे। इससे स्टेल्थ फाइटर जेट क्रूज़ मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल का ट्रैक किया जा सकेगा
नई प्रणाली में एक विशिष्ट X-बैंड रडार भी होगा जो क्वाडकॉप्टरड्रोन स्वार्म और छोटे ड्रोन को पहचानने और ट्रैक करने में सक्षम होगा। हाल के संघर्षों में ड्रोन खतरे को देखते हुए यह क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है
ये रडार 5,000 मीटर ऊंचाई तक भी काम कर सकेंगे यानी हिमालय में। साथ ही वे -40°C से +50°C तक के तापमान में भी काम करेंगे बिना रुके
वर्तमान प्रणाली जैसे अरुध्रा रडार रोहिणी रडार और प्रस्तावित सूर्या रडार इन नए रडारों के साथ काम करेंगे। इससे भारत को आसमान में होने वाली हर घटना की एक संयोजित और स्पष्ट तस्वीर मिलेगी।
सरकार का यह कदम भारत की हवाई सुरक्षा को नई उंचाई देगा और देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा। यह सिस्टम आने वाले समय में पारंपरिक लड़ाकू विमानों और ड्रोन जैसे नए खतरों से निपटने में भी महत्वपूर्ण होगा।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










