दिल्ली के निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उन्हें अभिभावकों से एक बार में एक महीने से अधिक राशि देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विद्यालयों ने पहले दो-तीन महीने या एडवांस फीस वसूलने का दबाव डाला जिससे खासकर कम आय वाले और मध्यमवर्गीय परिवारों को परेशानी हुई। अब इसे पूरी तरह से वर्जित कर दिया गया है। यह निर्णय लगातार मिल रही शिकायतों के बाद हुआ है क्योंकि कई स्कूलों ने एडवांस फीस मांगकर परिवारों पर खर्च करने का दबाव डाला था।
सरकार ने साफ किया है कि स्कूलों को अनुमति दी जा सकती है अगर अभिभावक चाहें तो अधिक महीनों की फीस दे सकते हैं लेकिन इसे अनिवार्य बनाना गलत होगा। साथ ही विद्यार्थी को समय पर फीस नहीं देने पर उनकी पढ़ाई प्रवेश या सुविधाओं पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
रेखा गुप्ता ने कहा कि अब अभिभावक किसी भी दुकान से बच्चों की किताबें ड्रेस और स्टेशनरी खरीद सकते हैं। स्कूल उन्हें किसी खास दुकान या अपने खुद के स्टोर से सामान खरीदने पर मजबूर नहीं कर सकता। इससे अभिभावकों को कम खर्च और स्वतंत्रता मिलेगी।
सरकार ने सभी स्कूलों को सात दिनों के भीतर इन नियमों को अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर दिखाने का आदेश दिया है। इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब स्कूलों में मनमानी नहीं होगी। सरकार कभी भी देख सकती है। इस निर्णय से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










