किसानों की मेहनत को मौसम में अचानक आए बदलाव और निरंतर बारिश ने बर्बाद कर दिया है। जबकि हजारों किसान गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग में तेजी से जुटे हुए थे, बारिश ने पूरी प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। खेतों में कटा हुआ गेहूं भीग गया है, जिससे गुणवत्ता पर असर पड़ने के साथ पैसे का नुकसान हो सकता है
ज्यादातर किसान इस समय गेहूं की कटाई के अंतिम चरण में हैं। कृषि विभाग ने कहा कि लाखों किसान इस प्रक्रिया में शामिल हैं, लेकिन अचानक बारिश से थ्रेसिंग कार्य बाधित हो रहा है। उत्पादन और भंडारण दोनों प्रभावित हो सकते हैं अगर जल्दी मौसम साफ नहीं होता
लगातार नमी के कारण खरबूजा, तरबूज, खीरा, ककड़ी, तरोई, लौकी, टिंडा, करेला और कद्दू जैसी फसलों में कीट व रोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, जिन किसानों के पास प्याज और लहसुन की खुदाई बाकी है, उनमें सड़न का खतरा बढ़ा है
कृषि विशेषज्ञ डा.सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि खेतों में जलभराव रोकना और नियमित निरीक्षण जरूरी है, जबकि कृषि विशेषज्ञ डा. सीपी श्रीवास्तव ने संतुलित दवा छिड़काव और नमी प्रबंधन पर जोर दिया है
जिला कृषि अधिकारी टीबी सिंह ने कहा कि बारिश से फसल प्रभावित होने पर किसानों को 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। देरी होने पर बीमा क्लेम मान्य नहीं होगा। किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद बीमा कंपनी मौके पर जाकर नुकसान का आंकलन करेगी और रिपोर्ट के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा
राजधानी में लगभग दो लाख किसान फसल बीमा योजना में शामिल हैं। विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे नुकसान की स्थिति में तुरंत सूचना दें और फसल का रिकार्ड व तस्वीरें सुरक्षित रखें, ताकि क्लेम प्रक्रिया में कोई दिक्कत न आए।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










