कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार को तिगरीधाम में गंगा स्नान के लिए बनाए गए घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर गंगे और महादेव के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय और उमंग से भर गया। करीब 30 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र डुबकी लगाई और अपने जीवन की सुख-समृद्धि की कामना की।
तिगरीधाम में ऐतिहासिक मेला और भव्य आयोजन
तिगरीधाम पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर उत्तर भारत का प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मेला लगता है। इस बार भी एक नवंबर को तिगरी गंगा मेला दीपोत्सव, दुग्धाभिषेक और महाआरती के साथ धूमधाम से शुरू हुआ था। बुधवार की सुबह से ही घाटों पर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। मंगलवार शाम को ही लाखों श्रद्धालु तिगरीधाम में डेरा डाल चुके थे और दीपदान के बाद गंगा में स्नान कर चुके थे।

घाटों पर छाया श्रद्धा और आस्था का रंग
गंगा के किनारे पूरा इलाका श्रद्धा, भव्यता और सांस्कृतिक रंगों से रंग गया था। हर-हर गंगे और जय गंगा मैया के उद्घोष पूरे वातावरण में गूंज रहे थे। सेक्टरवार बनाए गए घाटों पर भक्त मां गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाकर सुख-शांति की प्रार्थना करते नजर आए।
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर पहुंची 30 लाख के करीब
जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि सुबह से गंगा तटों पर करीब 25 लाख श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान था, लेकिन शाम तक यह संख्या बढ़कर लगभग 30 लाख तक पहुंचने की संभावना है। प्रशासन द्वारा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के कारण किसी भी मार्ग पर जाम नहीं लगा और श्रद्धालुओं की आवाजाही निर्बाध बनी रही।
मेले में धूमधाम से हुई खरीददारी
स्नान के बाद श्रद्धालु मेले में भी खूब खरीददारी करते नजर आए। सदर चौक पर लगी दुकानों पर भीड़ लगी रही। कोई समोसे-टिक्की का आनंद ले रहा था तो कोई स्वादिष्ट जलेबी और पकौड़ी का मजा ले रहा था। महिलाएं मीना बाजार में खासा उत्साह दिखा रही थीं और दुकानें रंगीन माल से सजी हुई थीं।
बच्चों का मुंडन संस्कार और गीतों की मिठास
कार्तिक पूर्णिमा पर बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया गया। इस पावन अवसर पर महिलाएं धार्मिक गीत गाती रहीं और घाटों पर बच्चे गंगा के पवित्र जल से स्नान करते नजर आए। यह दृश्य भक्तिभाव से परिपूर्ण था।
हर तरफ महक रही थी खिचड़ी की खुशबू
गंगा तट के तंबुओं में खिचड़ी की खुशबू चारों ओर फैल रही थी। स्नान के बाद श्रद्धालु काली दाल और चावल का दान करते हैं और अपने तंबुओं में खिचड़ी बनाते हैं। इसे गंगा मैया का प्रसाद माना जाता है। खिचड़ी को आम, मिर्च के आचार और देसी घी के साथ परोसा गया, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ गया।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










