छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता का सम्मान, शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में डिजिटल प्रदर्शनी

छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता का सम्मान, शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में डिजिटल प्रदर्शनी

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देश की आजादी के संघर्ष में भगवान बिरसा मुंडा, रानी गाईदीन्ल्यू, सिदो-कान्हू जैसे आदिवासी नायक-नायिकाओं का योगदान सभी जानते हैं। लेकिन ब्रिटिश शासनकाल में छत्तीसगढ़ के कई ऐसे आदिवासी वीर थे, जिनकी बहादुरी और संघर्ष का दस्तावेजीकरण आज तक नहीं हो पाया है और जिन्हें लोग भूल चुके हैं।

छत्तीसगढ़ के आदिवासी नायकों ने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और शोषण के खिलाफ कई बार विद्रोह किया। ये आंदोलन सिर्फ आजादी की लड़ाई ही नहीं थे, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे आदिवासी नायक-नायिकाओं के बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण के कई कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन किया।

नवा रायपुर के अटल नगर में बना संग्रहालय

यह संग्रहालय नवा रायपुर के अटल नगर में बनाया गया है और इसे छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति को समर्पित किया गया है। उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने संग्रहालय का अवलोकन किया और शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया।

शहीद वीर नारायण सिंह का योगदान

शहीद वीर नारायण सिंह को छत्तीसगढ़ का पहला शहीद माना जाता है। यह संग्रहालय करीब दस एकड़ में फैला हुआ है और जनजातीय प्रतिरोध की कहानी को 16 अलग-अलग दीर्घाओं के माध्यम से दर्शाता है। यहां 650 मूर्तियां, डिजिटल कथाएं, सांस्कृतिक प्रदर्शनियां, इंटरएक्टिव और इमर्सिव अनुभव उपलब्ध हैं, जो दर्शकों को आदिवासी नायकों के बलिदान और संघर्ष की जानकारी देते हैं।

संग्रहालय की खास बातें

  • स्वतंत्रता संग्राम: हल्बा, सरगुजा, भोपालपट्टनम, पारलकोट, तारापुर, मेरीया, कोई, लिंगागिरी, मुरिया और भुमकल क्रांतियों जैसे कई जनजातीय विद्रोहों को दर्शाया गया है।

  • महिला प्रतिरोध: 1878 की रानी चो-रिस क्रांति, जो महिलाओं के नेतृत्व वाले शुरुआती आंदोलनों में से एक थी।

  • शहीद वीर नारायण सिंह और 1857 का विद्रोह: ब्रिटिश अत्याचार के खिलाफ उनके संघर्ष और बलिदान की कहानी।

  • झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह: महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलनों में जनजातीय समुदाय की भागीदारी।

छत्तीसगढ़ आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के अनुसार, संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह की वंशावली भी रखी गई है और अन्य आदिवासी नायकों की वंशावली भी तैयार की जा रही है।

मोदी सरकार की पहल

स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समुदाय के योगदान को याद रखने और जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय विकसित कर रही है। इनमें से चार संग्रहालय अब तक बन चुके हैं—रायपुर (छत्तीसगढ़), रांची (झारखंड), छिंदवाड़ा और जबलपुर (मध्य प्रदेश)।

यह संग्रहालय न केवल छत्तीसगढ़ के आदिवासी नायकों की वीरता का दस्तावेज है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान और संघर्ष से जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

Neha Mishra
Author: Neha Mishra

नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।

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