Exercise Trishul: भारतीय सेना का बहु-क्षेत्रीय युद्ध में अद्भुत सामर्थ्य और आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

Exercise Trishul: भारतीय सेना का बहु-क्षेत्रीय युद्ध में अद्भुत सामर्थ्य और आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

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Exercise Trishul: भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना के साथ-साथ सीमा सुरक्षा बल (BSF) और तटरक्षक बल ने अभ्यास त्रिशूल के माध्यम से अपनी संयुक्त युद्ध क्षमता, तालमेल और आधुनिक तकनीकी दक्षता का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। इस बार का त्रिशूल अभ्यास एक मल्टी-डोमेन (बहु-क्षेत्रीय) युद्धाभ्यास है, जो पारंपरिक थल, जल और वायु के अलावा अब अंतरिक्ष और साइबर युद्धक्षेत्रों तक फैल चुका है।

अंतरिक्ष: रणनीतिक शक्ति का नया आधार

अभ्यास में पहली बार अंतरिक्ष आधारित संचार, निगरानी और टोही प्रणालियों को व्यापक रूप से शामिल किया गया। उपग्रहों से प्राप्त इमेजरी और रियल-टाइम डेटा की मदद से कमांडर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं, मिसाइल प्रक्षेप पथ का विश्लेषण कर सटीक हमलों की योजना बना सकते हैं। अंतरिक्ष संसाधनों का उपयोग सुरक्षित संचार, नेविगेशन और टार्गेटिंग के लिए भी किया जा रहा है। भारत अंतरिक्ष को एक “फोर्स मल्टीप्लायर” के रूप में देख रहा है ताकि सभी युद्धक्षेत्रों में समन्वय कायम रहे।

साइबर युद्ध: अदृश्य रणभूमि

त्रिशूल अभ्यास में साइबर युद्ध और सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। डिफेंस साइबर एजेंसी (DCA) की विशेष इकाइयां आक्रामक और रक्षात्मक साइबर मिशन चला रही हैं। इनमें नेटवर्क में घुसपैठ, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और संचार नेटवर्क पर हमले शामिल हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य यह परखना है कि डिजिटल व्यवधानों के बावजूद सशस्त्र बल अपने अभियानों को कैसे जारी रख सकते हैं। साइबर निगरानी, डेटा की अखंडता और इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकार के माध्यम से इन्फॉर्मेशन डॉमिनेंस की क्षमता को मजबूत किया जा रहा है, जो आधुनिक संकर युद्धों में निर्णायक होती है।

ड्रोन शक्ति: युद्धक्षेत्र का नया आयाम

इस बार अभ्यास में ड्रोन तकनीक का व्यापक उपयोग हुआ है। ड्रोन निगरानी, रसद आपूर्ति, कामिकाज़े (आत्मघाती) हमलों और आक्रामक अभियानों में उपयोग किए जा रहे हैं। ये मानवरहित प्रणालियां वास्तविक समय में युद्धक्षेत्र की जानकारी प्रदान करती हैं, दुर्गम इलाकों में सामग्री पहुंचाती हैं, और सटीक निशाने पर हमले करती हैं।

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भारतीय सेना के प्रमुख ड्रोन:

  • SWITCH UAVs और Netra Drones उच्च ऊँचाई पर निगरानी के लिए।
  • Nagastra-1 लूटरिंग म्यूनिशन सटीक कामिकाज़े हमलों के लिए।
  • टैक्टिकल क्वाडकॉप्टर अग्रिम मोर्चे पर रसद आपूर्ति के लिए।

भारतीय वायुसेना के ड्रोन:

  • Heron और अन्य UAVs दीर्घकालिक निगरानी के लिए।
  • स्वदेशी मध्यम ऊँचाई वाले ड्रोन (MALE)।
  • एयर डिफेंस और कॉम्बैट ड्रोन का विकास जारी।

भारतीय नौसेना के ड्रोन:

  • MQ-9B SeaGuardian समुद्री निगरानी व पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए।
  • Harop ड्रोन जहाज आधारित टोही और एंटी-रडार मिशनों के लिए।

अभ्यास त्रिशूल की विशेषताएं और भविष्य की तैयारी

ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों का समावेश भारत की युद्ध नीति को नेटवर्क-केंद्रित और स्वायत्त युद्ध की दिशा में अग्रसरित कर रहा है। सूचना, गति और सटीकता यहां निर्णायक भूमिका निभाती हैं। अभ्यास त्रिशूल में हाल के संघर्षों और अभियानों जैसे ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

Neha Mishra
Author: Neha Mishra

नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।

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