चीन ने एक बार फिर टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी ताकत साबित की है। झेजियांग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे बड़ा न्यूरोमॉर्फिक सुपरकंप्यूटर “डार्विन मंकी” पेश किया है। यह मशीन इंसानी दिमाग की तरह काम करने की क्षमता रखती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें 2 अरब आर्टिफिशियल न्यूरॉन्स और 100 अरब से ज्यादा सिनेप्सेस हैं, जो इसे इंसानों जैसी सोचने और निर्णय लेने की ताकत देते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सुपरकंप्यूटर आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करेगा और मशीनों को और स्मार्ट बनाएगा। इसका डिजाइन ऐसा है कि यह इंसानी दिमाग की तरह एक-दूसरे से कम्युनिकेट कर सकता है। खास बात यह है कि यह लगातार डेटा प्रोसेस करने के साथ-साथ ऊर्जा की बचत भी करता है।

इस चिप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ 2000W बिजली पर काम कर सकती है। इसे झेजियांग यूनिवर्सिटी के झेजियांग लैब में तैयार किया गया है और इसमें अलीबाबा ग्रुप ने निवेश किया है। यह चिप लॉजिकल थिंकिंग, गणितीय सवाल हल करने और कंटेंट बनाने जैसे कामों में बेहद उपयोगी साबित होगी। इसे खास तौर पर मशीनों को इंसानों जैसी समझ और सोच देने के लिए डिजाइन किया गया है।
चीन 2020 से ही इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। सबसे पहले उसने Darwin Mouse विकसित किया था, जिसमें 120 मिलियन आर्टिफिशियल न्यूरॉन्स थे। अब नया सुपरकंप्यूटर चिप 2 बिलियन न्यूरॉन्स और 100 बिलियन से ज्यादा सिनेप्सेस के साथ पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली बन चुका है।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










