Lucknow समाचार आज यह धारणा बन चुकी है कि IAS या CBI जैसी कठिन परीक्षाओं को पास करने के लिए दिल्ली-इलाहाबाद जैसे शहरों में खर्चिलो कोचिंग की आवश्यकता होती है। वहीं उपेंद्र गुप्ता की बेटियों ने इस झूठ को खत्म कर दिया है। बिना किसी बाहरी सहायता या लाखों रुपये खर्च करने वाली कोचिंग सेवाओं में अपनी जगह बनाई
उन्होंने घर की चारदीवारी के भीतर अपनी खुद की पढ़ाई कम किताबों और निरंतर संकल्प से वो मुकाम हासिल किया जिसका देश का हर युवा सपना देखता है। पिता उपेंद्र बताते हैं कि उनकी बेटियां बाहरी चकाचौंध से दूर रहती थीं और घंटों अपनी किताबों में खोई रहती थीं
उपेंद्र गुप्ता की खुशी तब और बढ़ी जब उनकी दूसरी बेटी CBI में चयनित हुई। उनकी एक बेटी जो पहले ही IAS अफसर बन चुकी है ने परिवार का मान बढ़ा दिया है। उपेंद्र वीडियो में भावुक होकर कहते हैं बताइए हम कितना खुश हैं। मां-बाप को इससे बड़ी खुशी नहीं मिलेगी।उनकी आवाज में उन संघर्षपूर्ण सालों का दुःख और बेटियों की सफलता का गौरव दोनों है
आर्थिक स्थिति के कारण उपेंद्र अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए लेकिन उन्होंने निर्णय लिया था कि गरीबी को अपनी बेटियों के सपनों की बाधा नहीं बनने देंगे। दिन-रात ट्रैफिक के शोर और प्रदूषण के बीच कैब चलाते रहे। यद्यपि वे अपनी बेटियों को बहुत कुछ नहीं दिए लेकिन उन्हें पढ़ाई के लिए आवश्यक किताबें और एक शांत वातावरण जरूर दिया। उपेंद्र का सीना गर्व से चौड़ा है आज जब उनकी बेटियां महान पदों पर हैं। एक पिता के लिए इससे बड़ी उपलब्धि क्या होगी कि आज दुनिया उनके बच्चों के नाम और काम से उन्हें याद करती है
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










