Hapur समाचार उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के लालपुर गांव से एक चित्र सामने आया है जो समाज की रूढ़िवादी परंपराओं को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करता है यहां चार बेटों में से एक मां का अंतिम संस्कार दो बेटियों ने किया। जब बेटों ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया तो वे न केवल समाज की बेटियों को तोड़ दिया बल्कि अपनी मां की अंतिम इच्छा का मान रखते हुए उन्हें मार डाला।
लालपुर की 85 वर्षीय हरनंदी देवी पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं। 17 अप्रैल को उनकी हालत बिगड़ने पर दिल्ली के AIIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह वेंटिलेटर पर लगभग नौ दिनों तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ती रही लेकिन बुधवार सुबह उनकी सांसें थम गईं। मां की मृत्यु के बाद उनकी दोनों बेटियां विमलेश और शगुन ने उनका पार्थिव शरीर अपने पैतृक गांव लालपुर लेकर गईं।
नम आंखों से बेटी शगुन बौद्ध ने बताया कि उनके पिता भारतीय वायुसेना में थे। 1987 में पिता की मृत्यु के बाद मां हरनंदी ने अकेले ही चार बेटों और दो बेटियों की देखभाल की। लेकिन संघर्षों के बदले उन्हें सिर्फ धोखा मिला। शगुन का कहना है कि भाइयों ने धोखे से मां की खेती की जमीन अपने नाम कर ली और उन्हें बेसहारा छोड़ दिया। मां ने पिछले कुछ वर्षों से अपनी दोनों बेटियों के साथ रह ही लिया था जिन्हें उन्होंने पाल-पोसकर पाल-पोसकर बड़ा किया था।
बेटों के व्यवहार से आहत हरनंदी देवी ने पहले ही वसीयत में कहा कि उनका अंतिम संस्कार उनकी बेटियों द्वारा किया जाएगा। विमलेश और शगुन ने गांव में अर्थी को कंधा दिया। दोनों बहनों ने श्मशान घाट पर प्रचलित वर्जनाओं को छोड़ दिया। श्मशान में उपस्थित लोगों ने भी बेटियों की साहस और समर्पण की प्रशंसा की। यह घटना उन बेटों के लिए एक प्रेरणा है जिन्होंने अपनी मां को बचपन में छोड़ दिया और उन बेटियों के लिए गर्व का विषय है जिन्होंने मरते दम तक अपनी मां का सम्मान रखा।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










