डिप्टी सीएम जय कुमार चौधरी ने बिहार विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शराबबंदी को लेकर उठ रहे सवालों का सशक्त बचाव किया।उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा में सभी लोग इस कानून को पारित करने पर सहमत थे। उनका कहना था कि बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम 2016 राज्य में लागू कानून है।
नहीं सिर्फ शराबबंदी कानून। मैं नहीं जानता कि इसे साजिश के तहत नामित किया गया है या आम बोलचाल में नीतीश कुमार की पहल पर सर्वसम्मति से पारित किया गया कानून उन्होंने कहा।
हत्या रोकने वाले कानून को क्या कहते हैं फिर शराबबंदी कानून को मद्य निषेध क्यों कहा जाए इस बहस के साथ उन्होंने शब्दों के माध्यम से झूठ बोलने का आरोप लगाया।
डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि कानून का मूल उद्देश्य शराब पीना अपराध घोषित करना है और जो लोग शराब पीते या बेचते हैं उन्हें सजा मिलेगी।
ऐसे में पूरे कानून को एक घटना के आधार पर असफल बताना उचित नहीं है। उनका कहना था कि अक्सर घटनाओं के बाद कानून को कटघरे में डालने की बजाय सवाल उठाया जाता है कि लोग शराब पी क्यों रहे हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने 2016 में विधानसभा से इस कानून की पारितता का भी स्मरण किया। उस समय की राजनीतिक परिस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने सदन की सीटिंग प्रणाली का भी उल्लेख किया।
राजस्थान में महागठबंधन की सरकार थी। उन्होंने कहा कि मैं आज जहां स् पीकर बैठे हैं वहीं था। वर्तमान स्पीकर ने पूर्ववर्ती अध्यक्ष की जगह ले ली। मेरे स्थान पर वर्तमान नेता पक्ष बैठा था।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री Samrat Choudhary का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने सदन को स्पष्ट किया कि यह कानून आगे भी लागू रहेगा।विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार शराबबंदी को सख्ती से लागू करती रहेगी।
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










