बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर कुमार यादव ने रिटायरमेंट की घोषणा की चीफ जस्टिस की कोर्ट में विदाई संबोधन देते हुए उन्होंने कहा कि मेरी बातों को तोड़ा-मरोड़ा गया, मेरी गलती नहीं हुई। जस्टिस शेखर यादव ने दिसंबर 2024 के बयान पर हुए विवाद का जिक्र करते हुए बार एसोसिएशन का समर्थन किया
दरअसल, जज शेखर कुमार यादव ने 2024 में विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में बयान दिया था। बयान में अधिकांश लोगों ने कहा कि देश चलने और धार्मिक टिप्पणियों के बाद बहस हुई
शेखर कुमार यादव ने दिए गए बयान से महाभियोग की मांग उठी। वहीं, पूर्व CJI संजीव खन्ना ने स्पष्टीकरण माँगा। रिटायरमेंट भाषण में जस्टिस यादव ने कहा कि उन्होंने कभी जाति या वकील के आधार पर भेदभाव नहीं किया। किसी भी वर्ग के वकीलों में विभेद नहीं किया
पेशे में आपसी सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है
जज दरोगा नहीं होता; हर व्यक्ति विनम्र होना चाहिए
अच्छे तर्क भी कमजोर केसों को मजबूत बना सकते हैं
जस्टिस यादव ने महिला वकीलों की बढ़ती संख्या का स्वागत करते हुए कहा कि जूनियर महिला वकीलों को खुद बहस करनी चाहिए। अपनी भाषण में, उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह हाई कोर्ट के जज बनेंगे और अपनी साधारण पृष्ठभूमि का उल्लेख किया
Author: Neha Mishra
नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।










