जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा- बदलती युद्ध तकनीक और झूठी सूचनाओं के बीच शांति सैनिकों की भूमिका अहम

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा- बदलती युद्ध तकनीक और झूठी सूचनाओं के बीच शांति सैनिकों की भूमिका अहम

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संयुक्त राष्ट्र के Troop Contributing Countries (UNTCC) प्रमुखों के सम्मेलन में थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शांति मिशनों की बदलती चुनौतियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में 56 से ज़्यादा जगहों पर संघर्ष चल रहे हैं और लगभग 19 देश इनमें शामिल हैं।

जनरल द्विवेदी ने बताया कि नई तकनीक, गैर-राज्य समूहों की बढ़ती भूमिका, हाइब्रिड युद्ध और झूठी सूचनाओं के प्रसार ने युद्ध की पारंपरिक सीमाओं को बदल दिया है। बदलती भू-राजनीतिक स्थितियां संयुक्त राष्ट्र की एकजुट कार्रवाई को और कठिन बना रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में मज़बूत, तेज़ और एकजुट प्रतिक्रिया की ज़रूरत है, जिसे केवल शांति सैनिक मिलकर दे सकते हैं।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा- बदलती युद्ध तकनीक और झूठी सूचनाओं के बीच शांति सैनिकों की भूमिका अहम

जनरल द्विवेदी ने शांति सैनिकों की बहुआयामी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उनका कहना था कि शांति सैनिक सिर्फ सुरक्षा देने वाले नहीं होते, बल्कि वे राजनयिक, तकनीकी जानकार, विकास लाने वाले और कई बार दूरदराज़ इलाकों में सूचना का एकमात्र माध्यम भी होते हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की नीली टोपी (ब्लू हेलमेट) मिशन को जोड़ने वाली मज़बूत कड़ी है और यह अन्य संगठनों को भी बेहतर काम करने में मदद करती है।

भारत का योगदान और अनुभव

सम्मेलन में उन्होंने बताया कि भारत, संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े शांति मिशन योगदानकर्ताओं में से एक है। भारत ने अब तक 71 में से 51 मिशनों में करीब 3 लाख सैनिक और महिला कर्मियों को भेजा है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि हमारे सैनिकों ने हमेशा दृढ़ संकल्प और साहस के साथ काम किया है और इन मिशनों से जो अनुभव मिला है, उसे हम दुनिया के साथ साझा करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने बताया कि नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग अब राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (National Centre of Excellence) के रूप में विकसित किया गया है। यहां विभिन्न देशों के अधिकारी प्रशिक्षण और अनुभव साझा करते हैं। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत में सम्मेलन का आयोजन वैश्विक शांति को मजबूत करने और सहयोग बढ़ाने का प्रतीक है। यह भारत की उस सोच को दर्शाता है जिसे हम वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्व बंधु के रूप में मानते हैं।

Neha Mishra
Author: Neha Mishra

नेहा मिश्रा बीते कुछ वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता पत्रकारिता और न्यू मीडिया के क्षेत्र में हासिल की है। नेहा मिश्रा ने भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया है।

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